कुछ लोगो की आँखों में आंसू होते हैं
जो दिखाई देते हैं.
वो आंसू जो दिखाई देते हैं शायद आप की आँखों से आंसू न निकाल पाए.
आप ऊपर ही ऊपर से समझ लें उस व्यक्ति कि समस्या-
बना के एक अदबदा सा या संवेदनशील चेहरा.
या फिर ऐसी कोई हुंकार, आवाज़ या हरकत करे
जो आपकी समस्या समझने की समझ को प्रदर्शित करती हो.
कुछ और लोगो की आँखों में आंसू होते हैं
जो दिखाई नहीं देते-
सिर्फ महसूस होते हैं.
गहरी किसी मार या हार या कोई नकली जीत
या कुछ और विश्वास डिगाने वाला कोई वाक्या,
इन आंसुओ को तपता हुआ बना देता है-
इन न दिखने वाले लेकिन महसूस होने वाले आंसुओ की तपिश से,
सामने वाले की आँखों में कुछ नम सा आ जाता है-
जो पिघला था कही दिल में.
ये लोग, जिनके आंसू दिखाई नहीं देते पर महसूस होते है,
छुपा लेते हैं अपना चेहरा,
दबा लेते हैं दिल के भीतर ही दिल की बात-
उन्हें पता है उनके आंसू दिखाई नहीं देते लेकिन महसूस होते है.
उन्हें डर है के बातो बातो में आंसू बह ना जाये.
चलो ढूँढ़ते हैं उन्हें जिनके आंसू छलक नहीं रहे,
अपने आस पास ही कही.
चलो उनसे दो बातें कर आते है !